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Disconcerted

brom, ign, mim-p, ozone

इस रुब्रिक को समझना थोड़ा कठिन होगा फिर भी यदि हम थोड़ा प्रयास करें तो इस रुब्रिक को समझ पाएंगे।
संभवत अंग्रेजी भाषा मे यह शब्द फ्रेंच शब्द deconcerter से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है -योजनाओं या व्यवस्थाओं को भंग करना, मन की शांति को भंग करना।

तो इस रुब्रिक का आशय इस प्रकार समझना चाहिए कि रोगी के मन की शांति भंग हो गई है और इस कारण से वह अपने द्वारा पूर्व में नियोजित व्यवस्थाओं और योजनाओं पर अब और आगे नहीं चलना चाहता है वह इनको यहीं पर रोक देना चाहता है भंग कर देना चाहता है अब उसका मन उसको उन योजनाओं और व्यवस्थाओं जिनको उसने स्वयं स्थापित किया था उनपर,आगे नहीं बढने देना चाहता है, अब उसे उनसे अपेक्षित लाभ होने की कोई आशा व विश्वास शेष नहीं है।

ऐसा कई बार हमने देखा है कि व्यक्ति परिस्थितियों से जूझते-जूझते एक ऐसी अवस्था में पहुंच जाता है जब उसे लगता है कि अब कुछ भी प्रयास करने से कोई लाभ नहीं हो रहा है और इसलिए कुछ भी प्रयास करना बंद कर देना चाहिए और वह ऐसा ही करता भी है।

उदाहरण से समझते हैं

एक बच्चा जो पढ़ने में थोड़ा सा तकलीफ महसूस कर रहा था एक दिन उसने अपने पिता से कहा कि मैं अब पढ़ाई नहीं कर सकता मुझे कुछ समझ नहीं आता और मुझे नहीं लगता मै पढ़ पाऊंगा, और इसलिए अब मैं पढ़ना बंद कर देना चाहता हूं।

एक रोगी जो सोच समझ कर एक चिकित्सा पद्धति को अपनाता है परंतु जब वह काफी प्रयास के बाद भी कोई राहत,अनुभव नहीं करता है तब वह एक ऐसी अवस्था में पहुंच जाता है जब वह ऐसा महसूस करने लगता है कि उसे अब यह इलाज बंद कर देना चाहिए वह अपने चिकित्सक को भी कहता है कि डॉक्टर साहब मैं अब इस इलाज को बंद कर देना चाहता हूं , मै किसी अन्य चिकित्सा पद्धति से इलाज करवाऊंगा।

एक कैंसर पेशेंट जिनकी कीमोथैरेपी चल रही थी वे इतनी परेशान हो गई थी कि उन्होंने यह निश्चित कर लिया कि अब चाहे जीवन बचे या न बचे पर अब वे कीमोथैरेपो नहीं करवाएंगी।

काफी बार रोगी ऐसा भी कहते हैं की डॉक्टर साहब अब मैं इस बीमारी का कोई इलाज नहीं करना चाहता हूं अगर यह अपने आप ठीक होगी तो ठीक है नहीं होगी तो ना सही पर अब मैं इसका कोई इलाज नहीं करना चाहता हूं।

एक युवती जिसको उसकी ससुराल में प्रताड़ित किया जाता था और वह अब तक सारी प्रताड़ना को यह सोचकर सह रही थी कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा किंतु जब बहुत प्रयास करने के बाद भी परिस्थितियां नहीं बदल रही थी, तो एक दिन वह सब कुछ छोड़कर यह निर्णय ले लेती है कि अब वह उस घर में वापस नहीं जाएगी अब वह उस प्रताड़ना को नहीं सहेगी भले ही अब उसके पति उसके साथ रहे या ना रहे भले उसे तलाक लेना पड़े या कुछ भी हो पर अब वह इस व्यवस्था को जारी रखने के पक्ष में नहीं है, और अह वह इसे और अधिक समय तक जारी नहीं रखेगी।

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