Alum., Anac., Ars., Bell., Canth., Carb-Veg., Helo-s., Hydrog., Hyos., Ignis-alc., Lach., Lyss., Manc., Mand., Op., Orot-ac., Plat., Positr., Psil., Sal-fr., Sil., Stram., Sulph., Verat.
इस रूब्रिक में 3 शब्द हैं और उनके अर्थ इस प्रकार हैं
Delusion, possessed, being
सरल शब्दो में समझने का प्रयास करें तो यह इस प्रकार पढना होगा
Delusion, being possessed
अब सबसे पहले हमे समझना होगा
Delusion is a persistent false believe regarding the self all persons or objects outside the self that is maintained despite in disputable evidences to the contrary.
स्वयं के या अपने आसपास के व्यक्तियों अथवा वस्तुओं के विषय में एक ऐसा विचार जो गलत होने के ठोस प्रमाण होने के बावजूद भी व्यक्ति उसे छोड़ता नहीं है।
यह तो इस शब्द की वैज्ञानिक व्याख्या है किंतु व्यावहारिक रूप से अगर हम देखें तो Delusiion रोगी की एक sensation या अनुभूति है अर्थात रोगी ऐसा अनुभव कर रहा है, ऐसा महसूस कर रहा है, वही उसका भ्रम है।
Possessed
Verb
2nd or 3rd form of verb
Possess
Means to have control over something or become owner of
इसका अर्थ है किसी चीज़ पर नियंत्रण रखना या उसका मालिक बनना
तो possessed का अर्थ होगा
अधिकार किया जा चुका है, या नियंत्रण मे लिया जा चुका है।
Being
Be +ing
Verb
होना व वर्तमान मे भी रहना।
अब हम सरल शब्दो मे समझते है कि रोगी को ऐसा अह्सास हो रहा है कि उसपर किसी ने नियंत्रण कर लिया है, अब उसका स्वयं पर अधिकार नही रहा है कोई या कुछ ऐसा है जिसने उसकी स्वायत्ता को समाप्त करके उसे अपना अधिकार जमा लिया है, अब उसे उस शक्ति या व्यक्ति के अनुरूप चलना, रहना प रहा है।
अर्थात रोगी का मानना है कि उसे पर किसी बुरी आत्मा का या किसी विचार का या किसी जुनून का इस कदर प्रभाव है या यू कहे की नियंत्रण है कि वह अपने सामान्य जीवन को नहीं जी पा रहा है जैसा वह पहले था अब वैसा नहीं रहा है और उसके रोग ने उसे पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है अब वह उसी प्रकार कार्य कर पा रहा है जैसा उसका रोग उसे करने दे रहा है अब वह स्वतंत्रता से अपना जीवन नहीं जी पा रहा है जैसा वह पहले कभी जीता था।
एक रोगी ने बताया की उसके शरीर पर एक बुरी आत्मा या कहें कि भूत का कब्जा है, जो कि उसे खुश नहीं रहने देता कुछ ना कुछ टेंशन देता रहता है और उसे परेशान रखता है उसे भूत के कारण ही वह अपनी बीमारी पर ध्यान नहीं दे पा रहा है वह भूत उसे परहेज नहीं करने देता और वही सब खाने के लिए प्रेरित करता रहता है जो वस्तुएं उसको नहीं खानी चाहिए।
उसका रोग उसे कुछ ऐसा नहीं करने दे रहा जो वह करना चाहता है बल्कि वह उसे करना पड़ता है जैसा उसका रोग उसे करवाना चाहता है।
जैसे एक रोगी कहता है, "मेरी बीमारी मुझे सोने नहीं दे रही है मेरा मन इसी में अटका है बस इसी को ही सोच रहा हूं ध्यान इसी में लगा हुआ है और इसके अलावा मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूं।"
रोगी कहता है बीमारी ने ऐसा कर दिया है कि अब बिना दवा के रह ही नही पाता हूं, यदि एक समय की दवा भी छूट जाए तो फिर से बीमारी बढने लगती, ये जा ही नही रहो है।
जैसे एक रोगी कहता है अब तो BP high रहने लगा है, Sugar बढी हुई रहती है।, बिना दवा एक दिन भी नही गुजरता, न खाने के न पीने के, न नमक का खा सकते न मीठा।
एक और मरीज कहता है बीमारी ने पकड रखा है, बहुत दवा कर ली पर जा ही नही रही है।
एक मरीज जिसको migraine की शिकायत थी उसने बताया कि डा साहब इस दर्द ने ऐसा कर दिया है कि सप्ताह मे 5 दिन दवा लेनी ही पडती है, उसके बाद भी कोई काम नही कर पाती, जरा सा कोई जोर से बोल दे तो दर्द हो जाता है, इसने ऐसी हालत कर दी है कि सारा दिन बिस्तर मे ही गुजर जाता है। कितना ही इलाज करवा लिया पर तेज से तेज दवा लेने पर भी बस बर्दाश्त करने लायक ही होता है पूरी तरह खत्म नही होता है।
एक मरीज कहती है डॉक्टर साहब अब पहले वाली बात नही रही जैसे मन किया कर लो, अब तो अपनी बीमारी के हिसाब से रहना पडता है। परहेज भी करना पडता है
👏👍🙏
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